सोमा मुखर्जी — जिन्हें बिखरी हुई चीज़ों को एक साथ जोड़ना आता है
एक ऐसी वेलनेस विशेषज्ञ जिन्होंने कभी खुद को किसी एक दायरे में नहीं बांधा—क्योंकि वे शुरुआती दिनों में ही समझ गई थीं कि किसी इंसान की असल समस्या सुलझाने के लिए केवल एक तरीका काफी नहीं होता।
जब उन्हें लगा कि किसी और का इंतज़ार करने से बात नहीं बनेगी
सोमा मुखर्जी ने देश के सबसे बड़े कॉर्पोरेट घरानों में से एक—टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) में 22 साल 9 महीने बिताए। उन्होंने TCS रिसर्च के पुणे केंद्र (TRDDC) में इंजीनियर्स, वैज्ञानिकों और प्रबंधकों के साथ मिलकर काम किया। इस दौरान उन्होंने बेहद करीब से देखा कि दिन का ज़्यादातर समय डेस्क पर बिताने से काबिल और समझदार लोगों की सेहत पर असल में क्या बीतती है।
तनाव सिर्फ दिमाग तक सीमित नहीं रहता। वह धीरे-धीरे कंधों में दर्द, पीठ के निचले हिस्से की जकड़न, नींद की कमी और पाचन की समस्या बनकर उभरता है। जो बातें इंसान खुद नहीं कह पाता, उसका शरीर कह देता है। सोमा ने गौर किया कि वेलनेस इंडस्ट्री इसका अधूरा और बिखरा हुआ हल दे रही थी—योग शिक्षक सिर्फ योग सिखा रहे थे, जिम कोच केवल ताकत बढ़ाने पर ज़ोर दे रहे थे, और थेरेपिस्ट सिर्फ विचारों पर काम कर रहे थे। कोई भी इन सब चीज़ों को एक साथ मिलाकर नहीं देख रहा था।
सोमा बचपन से ही एथलीट रही हैं। उनके पिता ने संतोष ट्रॉफी (फुटबॉल) और रणजी ट्रॉफी (क्रिकेट) दोनों में बिहार का प्रतिनिधित्व किया था। जिम्नास्टिक से शुरुआत करने के बाद सोमा योग की तरफ बढ़ीं और आगे चलकर लगातार ऑल इंडिया योग चैम्पियनशिप जीतीं। लेकिन उन्होंने सीखना बंद नहीं किया—उन्होंने स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग, सीबीटी (CBT), आयुर्वेद, न्यूट्रिशन साइंस और साइकोलॉजिकल काउंसलिंग की बारीकियों को समझा। यह सब कुछ एक साथ थोपने के लिए नहीं, बल्कि यह पहचानने के लिए था कि किस व्यक्ति को किस समय किस चीज़ की सबसे ज़्यादा ज़रूरत है।
"सबसे अहम वह इंसान है जो अपनी समस्या लेकर आया है। मुझे अपनी पसंद नहीं देखनी चाहिए—मुझे उसकी ज़रूरत को देखना चाहिए।"
उन्होंने 'बॉडी ब्रीथ वेल' की शुरुआत इसलिए की, क्योंकि जिन संस्थानों में वे काम कर रही थीं, वहाँ उन्हें अपने तरीके से काम करने की पूरी आज़ादी नहीं मिल पा रही थी। वे एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनाना चाहती थीं जहाँ इंसान केंद्र में हो—न कि कोई तरीका, कोई डिग्री या ट्रेनर की सहूलियत।
आज वे जो सेवाएँ देती हैं, यह वही तरीका है जिसकी तलाश उन्हें खुद शुरुआत में थी—एक ऐसी कार्यशैली जो तनाव, नींद, पोस्चर, मेटाबॉलिज्म और भावनात्मक संतुलन को अलग-अलग देखने के बजाय एक संपूर्ण प्रक्रिया मानती है—और सामने बैठे व्यक्ति की विशिष्ट ज़रूरतों के अनुसार प्रोग्राम तैयार करती है।

हमारा उद्देश्य
"मैं हर दिन लोगों की मदद करती हूँ ताकि वे तनावमुक्त हो सकें, शांत और मजबूत महसूस करें, खुद से बेहतर तरीके से जुड़ सकें—और समझ सकें कि उनकी बेहतर सेहत के लिए उनके मन और शरीर को क्या चाहिए।"
— सोमा मुखर्जी
इन कॉर्पोरेट संस्थानों में दी सेवाएँ
वेलनेस इंडस्ट्री की 3 बड़ी गलतफ़हमियाँ — और सोमा का अलग नज़रिया
वेलनेस एक संवाद है, केवल कोई नियम या अभ्यास नहीं
रास्ता चाहे योग हो, जिम हो या थेरेपी—वह अपने आप में अंतिम जवाब नहीं हो सकता। असली बात यह है कि आपको आज किस चीज़ की ज़रूरत है—हो सकता है वह ब्रीथवर्क हो, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग हो या सिर्फ शांत रहना हो। जो विशेषज्ञ केवल एक ही तरीका जानता है, वह सिर्फ एक ही जवाब दे सकता है।
अगर बदलाव नहीं दिख रहा, तो कमी आप में नहीं, प्रोग्राम में है
घिसे-पिटे प्रोग्राम से औसत नतीजे ही मिलते हैं। अगर आपकी पुरानी कोशिशें कामयाब नहीं हुईं, तो इसका मतलब यह नहीं कि आप में अनुशासन की कमी थी—दरअसल वह प्रोग्राम किसी काल्पनिक औसत इंसान के लिए बना था। आप औसत नहीं हैं। ढाँचा आपके हिसाब से बनना चाहिए, न कि आपको ढाँचे में ढलना पड़े।
मानसिक और शारीरिक सेहत दो अलग चीज़ें नहीं हैं
लगातार तनाव के बीच 8 घंटे कुर्सी पर बैठने वाले व्यक्ति के शरीर, मन और पोस्चर तीनों पर एक साथ असर पड़ता है। इनमें से किसी एक का अलग से इलाज करने से पूरी समस्या हल नहीं होती। सोमा इन्हें कभी अलग करके नहीं देखतीं।
इस अनुभव के पीछे का अध्ययन
करीब 30 सालों का अध्ययन, प्रतियोगिताएँ और अभ्यास—किसी एक विधा का विद्वान बनने के लिए नहीं, बल्कि यह समझने के लिए कि किस व्यक्ति को किस चीज़ की सही मायने में ज़रूरत है।
सरकारी प्रमाणन
YCB लेवल 3 — योग शिक्षक और मूल्यांकनकर्ता
योग सर्टिफिकेशन बोर्ड · आयुष मंत्रालय, भारत सरकार — भारत में सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त सर्वोच्च योग योग्यता।
शैक्षणिक योग्यताएँ
चैम्पियनशिप रिकॉर्ड
- All India Yoga Championship — 2 consecutive yearsVishnu Charan Ghosh Memorial Committee, Calcutta
- National Yog Vyayam Championship — 2 consecutive yearsYoga Federation of India
- Yoga Kumari Award — 2 consecutive yearsBihar Yoga Association
एक विशेषज्ञ का सफर
शुरुआती साल
एथलीट, जिम्नास्ट, ऑल इंडिया योग चैंपियन
संतोष ट्रॉफी और रणजी ट्रॉफी में बिहार का प्रतिनिधित्व करने वाले क्रिकेटर व फुटबॉलर की बेटी। जिम्नास्टिक से योग की शुरुआत हुई। उन्होंने लगातार दो बार ऑल इंडिया योग चैम्पियनशिप जीती—और तीन अन्य राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में खिताब हासिल किए।
1996
कॉर्पोरेट जगत में शुरुआत
कॉर्पोरेट वेलनेस ट्रेनर के रूप में संस्थानों के साथ काम करना शुरू किया। जल्द ही समझ आ गया कि एक ही प्रोग्राम सब पर लागू करने से किसी का फायदा नहीं होता।
जनवरी 2001
TCS रिसर्च में पहली योग और फिटनेस कंसलटेंट के रूप में नियुक्ति
टाटा रिसर्च डेवलपमेंट एंड डिज़ाइन सेंटर (TRDDC), पुणे से जुड़ीं—जिसकी पुष्टि TCS फेलो विनय कुलकर्णी ने भी की है। 22 साल 9 महीने तक TCS पुणे के सभी केंद्रों में योग, ब्रीथवर्क, RSI वर्कशॉप और 1:1 काउंसलिंग सेशन संचालित किए।
2004–2022
अभ्यास के साथ-साथ पढ़ाई — 5 शैक्षणिक योग्यताएँ
फिटनेस मैनेजमेंट में पीजी डिप्लोमा। योग और जीवन विज्ञान में मास्टर्स (जैन विश्व भारती यूनिवर्सिटी)। फुल-टाइम काम के साथ आयुष मंत्रालय के तहत YCB लेवल 3 सर्टिफिकेशन हासिल किया।
2026
'बॉडी ब्रीथ वेल' की स्थापना
एक ही मूल सिद्धांत पर आधारित: प्रोग्राम इंसान की ज़रूरत के अनुकूल होना चाहिए। किसी आम इंसान के लिए नहीं—खास आपके काम, आपके तनाव, आपके शरीर और आपकी दिनचर्या के हिसाब से।
TCS में 22 सालों का सफर कैसा रहा
वरिष्ठ वैज्ञानिकों, इंजीनियर्स और संस्थापकों के अपने अनुभव, जिन्होंने सालों तक सोमा के साथ काम किया है।
"सोमा TRDDC में नियुक्त होने वाली पहली योग और फिटनेस कंसलटेंट थीं। उनकी विशेषज्ञता और हंसमुख स्वभाव ही सबसे बड़ी वजह थी कि वर्कआउट से भागने वाले लोग भी नियमित रूप से फिटनेस से जुड़ गए। उनकी जो बात सबसे अलग है, वह है हर व्यक्ति की ज़रूरत के हिसाब से अलग दिनचर्या तैयार करना—और यह सुनिश्चित करना कि उसका पालन हो। गहरा ज्ञान, काम के प्रति जुनून और दूसरों की मदद करने की भावना का ऐसा मेल बहुत कम देखने को मिलता है।"
"एक दशक से भी ज़्यादा समय तक सोमा का छात्र रहना मेरे लिए सौभाग्य की बात रही है। उन्होंने मुझे और मेरे कई दोस्तों को फिटनेस के उस स्तर तक पहुँचाया, जिसकी हमने कल्पना भी नहीं की थी। क्या आप 50 की उम्र के बाद जीवन में पहली बार हाफ मैराथन दौड़ने और उसे पूरा करने की हिम्मत करेंगे? उनके साथ ट्रेनिंग लेना न सिर्फ मज़ेदार और फायदेमंद है, बल्कि जिंदगी भर का एक रिश्ता बन जाता है।"
"सोमा ने हमारे दफ़्तर में योग के प्रति उत्साह रखने वाले कई ग्रुप बनाए हैं। उनमें लोगों को अपनी कुर्सी से उठाकर एक्सरसाइज रूम तक लाने का एक अनोखा हुनर है—कभी हंसी-मज़ाक में तो कभी एक्सरसाइज न करने के नुकसान समझाकर। सोमा न केवल योग और फिटनेस की माहिर हैं, बल्कि सामान्य जीवन और सेहत के बारे में भी उनका ज्ञान बहुत व्यावहारिक है।"
शुरुआत करने का सबसे अच्छा तरीका है एक मुफ्त ट्रायल क्लास — कोई बाध्यता नहीं, कोई लंबा फॉर्म नहीं, कोई जल्दबाज़ी नहीं।
सोमा एक समय में सीमित लोगों के साथ ही काम करती हैं। हर सेशन खास आपके हिसाब से तैयार किया जाता है।
